आदिवासी

सुजाता

मेरा नाम सुजाता है।

मे पैदा एक आदिवासी कबीले मे हुई। मेरा घर एक झोपडी जैसा था। पिछडी जाती की होने के कारण मेने बारवी तक शिक्षा की मुझे नौकरी मिल गई। मे जहा पर नौकरी करती थी। मेरे घर से 30किलोमीटर दुरी पर था, रोज मुझे घर से कार्यालयों आने जाने के लिए बस या जो गाड़ी मिले उस से सफर करना पड़ता था।

मे सुजाता आप सभी को मेरे बारे मे बता दू दोस्तो। मे एक आदिवासी औरत होने के कारण मेरी ऊंचा ई पाच फूट सत इंच थी। मेरी उमर 27 साल होने के बाद भी मेरी शादी नहीं हुई, मेरे स्तन आकर बहुत मोठे मोठे थे। 40के गोले होने के कारण जब कभी मे बाहर घूमने जाती तो लड़को और बुजुर्गो के लुंड हिलने लगते थे। मेरे कबीले मे मालिक का लडका था विनोद, उसका दिल मेरे पे फ़िदा था। विनोद किसी हीरो से कम नहीं था।

विनोद हमेशा मेरे आगे पीछे घूमता रहता था। हम सभी लोग नदी पे नहाने के लिए जाते थे। एक बार हमारे पीछे आते आते नदी तक विनोद आ गया। जब हम नहाने के लिए कपडे निकाले और नदी मे नहाने लगे तो विनोद एक पथरी पर बैठ कर हमें देखने लगा। मेरे साथ मेरी सहेलिया थी, रानी, शब्बो, कामिनी, और चार सहेलिया थी। सब दिखने मे एक से एक थी। हम सभी एक दूसरे को रगडने लगे, हम सभी के शरीर खुला हुवे थे। विनोद देख रहा था, और मेरे को इशारे कर रहा था। मे मजा ले रही थी, उसे तड़पना चाहती थी। मेरी सहेली ने मेरे स्तन को रगड़ने लगी मेरे मुह से आवाजे निकल रही थी। मेने भी अपनी दूसरी सहेली के स्तन दबाना शुरू कर दिए। मेरे चूत मे जलन शुरू हो गई, अब मेरे चूत को लुंड चाहिए यह मेरे समझ मे आ गया।

मेरी सहेलिया मुझे सहला रही थी, मे विनोद की तरफ देख रही थी। मेरी एक सहेलिने मेरी चूत मे उंगली डाल दी, मेरे शरीर मे एक सनसनी सी आ गई, मेरे को तो अब लुंड की जरूरत थी लेकिन विनोद सिर्फ देख रहा था। मेरी दूसरी सहेलिया भी मेरे साथ क्रीड़ा मे प्रतिभागी हो गई, मेने मेरी एक सहेली के चूत मे उंगली करना चालू कर दिया।

अब हम सब सहेलिया एक दूसरे के साथ वासना कर रहे थे। यह सब खेल विनोद देखकर अपना लुंड पायजामे अंदर ही सहला रहा था और हम सब की वासना देख रहा था। तब मेने अपनी सहेली के स्तन चूसना चालू कर दिए ओ तड़फने लगी, मे जोर जोर से उसके स्तन चूस रही थी और दूसरी सहेली के स्तन दबाने लगी थी। मेरे सहेली मेरे चूत मे उंगली जोर जोर से अंदर बाहर कर रही थी। हम सब सहेलिया हर वक्त ऐसा खेल खेलते रहते थे लेकिन आज हमारे सामने हमारे विनोदजी बैठकर यह देख रहे थे इसलिए आज का दिन अलग है लग रहा था। तब अचानक मेरी सहेलिने मेरे चूत की उंगली निकाल कर पीछे से डाल दी मेरे मुह से आह !!!!आह !!!!बस निकालो, प्लीज प्लीज जोर से करो डालो फड़ो जोर से तब अचानक विनोद ने पानी मे डुपकी लगा कर हमारे पास आकर खडा हो गया और हम सब सहेलियों को देखता रह गया।

हम सब सहेलिया आदिवासी होने के कारण सबके स्तन साइज मे बड़े बड़े थे इसलिए विनोदजी मेरे सहेली रानी के पीछे खड़े हो गया और रानी को सहलाने लगे। रानी को पीछे से विनोदजी का लुंड घस्ने लगे और दूसरी सहेली अपना स्तन विनोदजी के मुह मे डालने की कोशिश कर रही थी। विनोदजी ने मेरी सहेली का स्तन चूसना शुरू कर दिया, मेरे सहेलिने मुझे विनोदजी की तरफ खींचा और बोली दूर क्या देख रही हैं ले अब मुह मे!मेने विनोदजी का लुंड पायजामे के बाहर निकाला चूसने लगी। विनोदजी का लुंड का साइज 10इंच लम्बा और काफी मोटा था, मुह मे घुसने का नाम नहीं ले रहा था।

मेने विनोद का लुंड चूसने लगी मेरी सहेलिया मेरा स्तन चूसने लगी और मेरी चूत मे उंगली करने लगी। मेरी मुह मे विनोदजी का लुंड होने के कारण मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरी एक सहेलिने मेरी चूत पर अपना मुह लगाके चूत चूसना चालू कर दिया अब मुज़से रहा नहीं जा रहा था। मेरी एक सहेलिने मेरी पीछे अपना मुह लगाके अपनी नोकीली जीभा से सहलाना चालू कर दिया हम छह सहेलिया एक हो कर आज विनोदजी से चुदवाने वाली थी। मेरी मुह से लुंड निकाल कर विनोदजी ने चूत पर रख दिया और एक झटके मे चूत मे आधा चला गया। मेरी सहेली का स्तन विनोदजी के मुह मे लुंड मेरी चूत मे, विनोदजी जोर जोर से मुझे चोदना कर रहे थे मेरे मुह से आह !!!!!!!ओह् !!!!!!आह अरेरे ओह्!!!!ऐसा लग रहा था आज मेरी चूत फाड् है डालेंगे ? विनोदजी आरामसे प्लीज मारो जोर लगा ओ मारो !!!!!!!डालो जोर से प्लीज डालो !!!!!!विनोदजी जोर जोर से नदी मे मुझे चोदना कर रहे थे। मेरी सारि सहेलिया विनोदजी को सहला रही थी

विनोदजी ने अपना लुंड चूत मेसे निकाल कर मेरी पीछे से लगा दिया, पीछे से रगड़ने लगे। विनोदजी का लुंड पहले सेही काफी लम्बा हो चूका था, मेरी सहेलिने विनोदजी का लुंड मुह मे लेके चूसने लगी, विनोदजी ने मेरा स्तन मुह मे लेके चूसने लगे। अब मेरी से रहा नहीं जा रहा था, मेने सहेली के मुह से विनोदजी का लुंड निकला और चूत पर रख दिया, तब विनोदजी बोले पहले पिछेसे लेना होंगा तब चूत मारूंगा !बोलो? मेने अपना सर हिला के ! बोला !ठीक है।

विनोदजी ने मेरे दोनों हात पथरी पर रख दिए, मुझे घोड़ी बनाके पीछे से चोदने लगे, मेरी सहेली मेरी निचे आकर सोने लगी और मेरी स्तन को चूस रही थी, पीछे से विनोदजी जोर जोर से अंदर बाहर लुंड कर रहे थे। मे भी पुरे जोर से उनका साथ दे रही थी। अब मूजसे रहा नहीं जा रहा था !मने विनोदजी से कहा प्लीज बाहर निकालो और चूत मे डालो मेरी गांड फट गई है, प्लीज विनोद !!!!!!आह !!!!!आह !!!!प्लीज !मेरी सहेलिने मेरा स्तन चूसना छोड़ा और चूत मे उंगली डाल दी, पिछेसे लुंड और आगेसे उंगली जोर जोर से वासना चालू थी, तब अचानक विनोद जजी ने लुंड निकला चूत मे डाल दिया।

मेरे चूत मे विनोदजी का लुंड जाते ही मुझे अच्छा लगने लगा, मे विनोदजी जोर से डालो फाड़ो आज मेरी चूत !!!!!!!आह आह ओह् !!!!जोर लगा ओ मारो जोर से अब मे झड़ने वाली थी, अकड़ने लगी मेरा सारा पानी नदी मे बहने लगा अब मेने जोर से विनोदजी को दबा लिया। और मे शांत हो गई, बहुत दिनों के बाद मुझे एसा मौका मिला था। रानी ने मुझे विनोदजी से अलग करके अपनी चूत पर विनोद जि का लुंड रख दिया, विनोद जि रानी को चोदते रह गए। एक के बाद एक हम सब सहेलियों के चूत मे विनोदजी ने अपना लुंड डाला लेकिन सबसे ज्यादा मजा मुझे मिला अब जभी हम नहाने के लिए नदी पर जाते तो विनोदजी को इशारा कर देते थे। कहानी पसंद आये तो फॉलो जरूर करना दोस्तो !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

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